महाभारत 3.45.17
अहो नैनं भवान्वेत्ति पुराणमृषिसत्तमम्शृणु मे वदतो ब्रह्मन्योऽयं यच्चास्य कारणम्
aho nainaṃ bhavānvetti purāṇamṛṣisattamamśṛṇu me vadato brahmanyo'yaṃ yaccāsya kāraṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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