महाभारत 3.45.23
तर्कयन्ते सुरान्हन्तुं बलदर्पसमन्विताःदेवान्न गणयन्ते च तथा दत्तवरा हि ते
tarkayante surānhantuṃ baladarpasamanvitāḥdevānna gaṇayante ca tathā dattavarā hi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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