महाभारत 3.45.25
योऽसौ भूमिगतः श्रीमान्विष्णुर्मधुनिषूदनःकपिलो नाम देवोऽसौ भगवानजितो हरिः
yo'sau bhūmigataḥ śrīmānviṣṇurmadhuniṣūdanaḥkapilo nāma devo'sau bhagavānajito hariḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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