महाभारत 3.45.2पाद्यमाचमनीयं च प्रतिग्राह्य नृपात्मजम्प्रवेशयामासुरथो पुरंदरनिवेशनम्pādyamācamanīyaṃ ca pratigrāhya nṛpātmajampraveśayāmāsuratho puraṃdaraniveśanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें