महाभारत 3.46.16
यथा हि किरणा भानोस्तपन्तीह चराचरम्तथा पार्थभुजोत्सृष्टाः शरास्तप्स्यन्ति मे सुतान्
yathā hi kiraṇā bhānostapantīha carācaramtathā pārthabhujotsṛṣṭāḥ śarāstapsyanti me sutān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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