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महाभारत 3.46.9
द्रोणकर्णौ प्रतीयातां यदि भीष्मोऽपि वा रणेमहान्स्यात्संशयो लोके न तु पश्यामि नो जयम्
droṇakarṇau pratīyātāṃ yadi bhīṣmo'pi vā raṇemahānsyātsaṃśayo loke na tu paśyāmi no jayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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