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महाभारत 3.48.34
तेषां द्रक्ष्यसि पाञ्चालि गात्राणि पृथिवीतलेक्रव्यादैः कृष्यमाणानि भक्ष्यमाणानि चासकृत्
teṣāṃ drakṣyasi pāñcāli gātrāṇi pṛthivītalekravyādaiḥ kṛṣyamāṇāni bhakṣyamāṇāni cāsakṛt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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