महाभारत 3.48.3
दृढायुधौ दूरपातौ युद्धे च कृतनिश्चयौशीघ्रहस्तौ दृढक्रोधौ नित्ययुक्तौ तरस्विनौ
dṛḍhāyudhau dūrapātau yuddhe ca kṛtaniścayauśīghrahastau dṛḍhakrodhau nityayuktau tarasvinau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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