महाभारत 3.49.26
असंशयं महाबाहो हनिष्यसि सुयोधनम्वर्षात्त्रयोदशादूर्ध्वं सह गाण्डीवधन्वना
asaṃśayaṃ mahābāho haniṣyasi suyodhanamvarṣāttrayodaśādūrdhvaṃ saha gāṇḍīvadhanvanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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