महाभारत 3.52.21
एवमुक्तस्तु वैदर्भ्या नलस्तां प्रत्युवाच हनलं मां विद्धि कल्याणि देवदूतमिहागतम्
evamuktastu vaidarbhyā nalastāṃ pratyuvāca hanalaṃ māṃ viddhi kalyāṇi devadūtamihāgatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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