महाभारत 3.52.23
तेषामेव प्रभावेन प्रविष्टोऽहमलक्षितःप्रविशन्तं हि मां कश्चिन्नापश्यन्नाप्यवारयत्
teṣāmeva prabhāvena praviṣṭo'hamalakṣitaḥpraviśantaṃ hi māṃ kaścinnāpaśyannāpyavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें