महाभारत 3.54.19
यथा देवैः स मे भर्ता विहितो निषधाधिपःतेन सत्येन मे देवास्तमेव प्रदिशन्तु मे
yathā devaiḥ sa me bhartā vihito niṣadhādhipaḥtena satyena me devāstameva pradiśantu me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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