महाभारत 3.54.34
अवाप्य नारीरत्नं तत्पुण्यश्लोकोऽपि पार्थिवःरेमे सह तया राजा शच्येव बलवृत्रहा
avāpya nārīratnaṃ tatpuṇyaśloko'pi pārthivaḥreme saha tayā rājā śacyeva balavṛtrahā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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