महाभारत 3.54.38एवं स यजमानश्च विहरंश्च नराधिपःररक्ष वसुसंपूर्णां वसुधां वसुधाधिपःevaṃ sa yajamānaśca viharaṃśca narādhipaḥrarakṣa vasusaṃpūrṇāṃ vasudhāṃ vasudhādhipaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें