Loading
महाभारत 3.59.3
बृहदश्व उवाच · bṛhadaśva uvāca
इति ब्रुवन्नलो राजा दमयन्तीं पुनः पुनःसान्त्वयामास कल्याणीं वाससोऽर्धेन संवृताम्
iti bruvannalo rājā damayantīṃ punaḥ punaḥsāntvayāmāsa kalyāṇīṃ vāsaso'rdhena saṃvṛtām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें