महाभारत 3.59.5
तां सभामुपसंप्राप्य तदा स निषधाधिपःवैदर्भ्या सहितो राजा निषसाद महीतले
tāṃ sabhāmupasaṃprāpya tadā sa niṣadhādhipaḥvaidarbhyā sahito rājā niṣasāda mahītale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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