महाभारत 3.59.7दमयन्त्यपि कल्याणी निद्रयापहृता ततःसहसा दुःखमासाद्य सुकुमारी तपस्विनीdamayantyapi kalyāṇī nidrayāpahṛtā tataḥsahasā duḥkhamāsādya sukumārī tapasvinīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें