महाभारत 3.60.14
सा तीव्रशोकसंतप्ता मुहुर्निःश्वस्य विह्वलाउवाच भैमी निष्क्रम्य रोदमाना पतिव्रता
sā tīvraśokasaṃtaptā muhurniḥśvasya vihvalāuvāca bhaimī niṣkramya rodamānā pativratā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें