महाभारत 3.60.20
सहसाभ्यागतां भैमीमभ्याशपरिवर्तिनीम्जग्राहाजगरो ग्राहो महाकायः क्षुधान्वितः
sahasābhyāgatāṃ bhaimīmabhyāśaparivartinīmjagrāhājagaro grāho mahākāyaḥ kṣudhānvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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