महाभारत 3.60.24
श्रान्तस्य ते क्षुधार्तस्य परिग्लानस्य नैषधकः श्रमं राजशार्दूल नाशयिष्यति मानद
śrāntasya te kṣudhārtasya pariglānasya naiṣadhakaḥ śramaṃ rājaśārdūla nāśayiṣyati mānada
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें