महाभारत 3.61.110
उन्मत्तरूपा शोकार्ता तथा वस्त्रार्धसंवृताकृशा विवर्णा मलिना पांसुध्वस्तशिरोरुहा
unmattarūpā śokārtā tathā vastrārdhasaṃvṛtākṛśā vivarṇā malinā pāṃsudhvastaśiroruhā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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