महाभारत 3.61.49
त्यक्तश्रियं भर्तृहीनामनाथां व्यसनान्विताम्अन्वेषमाणां भर्तारं तं वै नरवरोत्तमम्
tyaktaśriyaṃ bhartṛhīnāmanāthāṃ vyasanānvitāmanveṣamāṇāṃ bhartāraṃ taṃ vai naravarottamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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