महाभारत 3.61.4जम्ब्वाम्रलोध्रखदिरशाकवेत्रसमाकुलम्काश्मर्यामलकप्लक्षकदम्बोदुम्बरावृतम्jambvāmralodhrakhadiraśākavetrasamākulamkāśmaryāmalakaplakṣakadambodumbarāvṛtamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें