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महाभारत 3.61.52
किं मां विलपतीमेकां पर्वतश्रेष्ठ दुःखिताम्गिरा नाश्वासयस्यद्य स्वां सुतामिव दुःखिताम्
kiṃ māṃ vilapatīmekāṃ parvataśreṣṭha duḥkhitāmgirā nāśvāsayasyadya svāṃ sutāmiva duḥkhitām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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