महाभारत 3.61.55
वैदर्भीत्येव कथितां शुभां राज्ञो महात्मनःआम्नायसारिणीमृद्धां मम शोकनिबर्हिणीम्
vaidarbhītyeva kathitāṃ śubhāṃ rājño mahātmanaḥāmnāyasāriṇīmṛddhāṃ mama śokanibarhiṇīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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