महाभारत 3.61.57सा गत्वा त्रीनहोरात्रान्ददर्श परमाङ्गनातापसारण्यमतुलं दिव्यकाननदर्शनम्sā gatvā trīnahorātrāndadarśa paramāṅganātāpasāraṇyamatulaṃ divyakānanadarśanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें