महाभारत 3.61.97
उपगम्य तरुश्रेष्ठमशोकं पुष्पितं तदापल्लवापीडितं हृद्यं विहंगैरनुनादितम्
upagamya taruśreṣṭhamaśokaṃ puṣpitaṃ tadāpallavāpīḍitaṃ hṛdyaṃ vihaṃgairanunāditam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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