महाभारत 3.62.14
यन्नाहमद्य मृदिता हस्तियूथेन दुःखितान ह्यदैवकृतं किंचिन्नराणामिह विद्यते
yannāhamadya mṛditā hastiyūthena duḥkhitāna hyadaivakṛtaṃ kiṃcinnarāṇāmiha vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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