महाभारत 3.62.32
ततो बहुतिथे काले सुप्तामुत्सृज्य मां क्वचित्वाससोऽर्धं परिच्छिद्य त्यक्तवान्मामनागसम्
tato bahutithe kāle suptāmutsṛjya māṃ kvacitvāsaso'rdhaṃ paricchidya tyaktavānmāmanāgasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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