महाभारत 3.62.36अथ वा स्वयमागच्छेत्परिधावन्नितस्ततःइहैव वसती भद्रे भर्तारमुपलप्स्यसेatha vā svayamāgacchetparidhāvannitastataḥihaiva vasatī bhadre bhartāramupalapsyaseइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें