महाभारत 3.62.3ददृशुर्वणिजो रम्यं प्रभूतयवसेन्धनम्बहुमूलफलोपेतं नानापक्षिगणैर्वृतम्dadṛśurvaṇijo ramyaṃ prabhūtayavasendhanambahumūlaphalopetaṃ nānāpakṣigaṇairvṛtamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें