महाभारत 3.62.43
सैरन्ध्रीमभिजानीष्व सुनन्दे देवरूपिणीम्एतया सह मोदस्व निरुद्विग्नमनाः स्वयम्
sairandhrīmabhijānīṣva sunande devarūpiṇīmetayā saha modasva nirudvignamanāḥ svayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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