महाभारत 3.62.4
तं दृष्ट्वा मृष्टसलिलं मनोहरसुखावहम्सुपरिश्रान्तवाहास्ते निवेशाय मनो दधुः
taṃ dṛṣṭvā mṛṣṭasalilaṃ manoharasukhāvahamsupariśrāntavāhāste niveśāya mano dadhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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