महाभारत 3.67.22
तच्च वाक्यं तथा सर्वे तत्र तत्र विशां पतेश्रावयां चक्रिरे विप्रा दमयन्त्या यथेरितम्
tacca vākyaṃ tathā sarve tatra tatra viśāṃ pateśrāvayāṃ cakrire viprā damayantyā yatheritam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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