महाभारत 3.67.2
बृहदश्व उवाच · bṛhadaśva uvāca
दमयन्त्या तथोक्ता तु सा देवी भृशदुःखिताबाष्पेण पिहिता राजन्नोत्तरं किंचिदब्रवीत्
damayantyā tathoktā tu sā devī bhṛśaduḥkhitābāṣpeṇa pihitā rājannottaraṃ kiṃcidabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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