महाभारत 3.68.10
प्राणयात्रां परिप्रेप्सोः शकुनैर्हृतवाससःआधिभिर्दह्यमानस्य श्यामा न क्रोद्धुमर्हति
prāṇayātrāṃ pariprepsoḥ śakunairhṛtavāsasaḥādhibhirdahyamānasya śyāmā na kroddhumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें