महाभारत 3.70.20
अकाम इव तं राजा गणयस्वेत्युवाच हसोऽवतीर्य रथात्तूर्णं शातयामास तं द्रुमम्
akāma iva taṃ rājā gaṇayasvetyuvāca haso'vatīrya rathāttūrṇaṃ śātayāmāsa taṃ drumam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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