महाभारत 3.70.25
ऋतुपर्णस्ततो राजा बाहुकं कार्यगौरवात्हयज्ञानस्य लोभाच्च तथेत्येवाब्रवीद्वचः
ṛtuparṇastato rājā bāhukaṃ kāryagauravāthayajñānasya lobhācca tathetyevābravīdvacaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें