महाभारत 3.70.39ततो गतज्वरो राजा नलोऽभूत्पृथिवीपतेविमुक्तः कलिना राजन्रूपमात्रवियोजितःtato gatajvaro rājā nalo'bhūtpṛthivīpatevimuktaḥ kalinā rājanrūpamātraviyojitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें