महाभारत 3.71.10
यदि वै तस्य वीरस्य बाह्वोर्नाद्याहमन्तरम्प्रविशामि सुखस्पर्शं विनशिष्याम्यसंशयम्
yadi vai tasya vīrasya bāhvornādyāhamantarampraviśāmi sukhasparśaṃ vinaśiṣyāmyasaṃśayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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