महाभारत 3.71.28ऋतुपर्णे गते राजन्वार्ष्णेयसहिते नृपेबाहुको रथमास्थाय रथशालामुपागमत्ṛtuparṇe gate rājanvārṣṇeyasahite nṛpebāhuko rathamāsthāya rathaśālāmupāgamatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें