महाभारत 3.71.32
वार्ष्णेयेन भवेन्नूनं विद्या सैवोपशिक्षितातेनास्य रथनिर्घोषो नलस्येव महानभूत्
vārṣṇeyena bhavennūnaṃ vidyā saivopaśikṣitātenāsya rathanirghoṣo nalasyeva mahānabhūt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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