महाभारत 3.71.6
प्रासादस्थाश्च शिखिनः शालास्थाश्चैव वारणाःहयाश्च शुश्रुवुस्तत्र रथघोषं महीपतेः
prāsādasthāśca śikhinaḥ śālāsthāścaiva vāraṇāḥhayāśca śuśruvustatra rathaghoṣaṃ mahīpateḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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