महाभारत 3.74.10
अनागसं प्रियां भार्यां विजने श्रममोहिताम्अपहाय तु को गच्छेत्पुण्यश्लोकमृते नलम्
anāgasaṃ priyāṃ bhāryāṃ vijane śramamohitāmapahāya tu ko gacchetpuṇyaślokamṛte nalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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