महाभारत 3.74.12
साक्षाद्देवानपाहाय वृतो यः स मया पुराअनुव्रतां साभिकामां पुत्रिणीं त्यक्तवान्कथम्
sākṣāddevānapāhāya vṛto yaḥ sa mayā purāanuvratāṃ sābhikāmāṃ putriṇīṃ tyaktavānkatham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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