महाभारत 3.74.15
अतीव कृष्णताराभ्यां रक्तान्ताभ्यां जलं तु तत्परिस्रवन्नलो दृष्ट्वा शोकार्त इदमब्रवीत्
atīva kṛṣṇatārābhyāṃ raktāntābhyāṃ jalaṃ tu tatparisravannalo dṛṣṭvā śokārta idamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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