Loading
महाभारत 3.74.17
त्वया तु धर्मभृच्छ्रेष्ठे शापेनाभिहतः पुरावनस्थया दुःखितया शोचन्त्या मां विवाससम्
tvayā tu dharmabhṛcchreṣṭhe śāpenābhihataḥ purāvanasthayā duḥkhitayā śocantyā māṃ vivāsasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें