महाभारत 3.74.21
कथं नु नारी भर्तारमनुरक्तमनुव्रतम्उत्सृज्य वरयेदन्यं यथा त्वं भीरु कर्हिचित्
kathaṃ nu nārī bhartāramanuraktamanuvratamutsṛjya varayedanyaṃ yathā tvaṃ bhīru karhicit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें