महाभारत 3.74.5
एवमुक्ता तु वैदर्भ्या सा देवी भीममब्रवीत्दुहितुस्तमभिप्रायमन्वजानाच्च पार्थिवः
evamuktā tu vaidarbhyā sā devī bhīmamabravītduhitustamabhiprāyamanvajānācca pārthivaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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