महाभारत 3.75.4
तेन वाक्ये हृते सम्यक्प्रतिवाक्ये तथाहृतेउपायोऽयं मया दृष्टो नैषधानयने तव
tena vākye hṛte samyakprativākye tathāhṛteupāyo'yaṃ mayā dṛṣṭo naiṣadhānayane tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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